#मेरा_एकांत_शांतवास 1
मानव हूँ और मानव मन बहुत ही चंचल होता है, एकदम हवाओ से भी तेज। घर की दीवारों में कैद ये लगने लगा था शायद इस दुनिया मे अकेला मैं ही बचा हूँ, एकांत, शांत क्लांत , सन्नाटा , चारो तरफ सांय सांय चलने वाली हवा डराने लगी थी। सकारात्मक विचार लाने की बहुत कोशिस की लेकिन लगा कि किसी को देख तो लूं, किसी को मुस्कुराते देख तो लूं, कहीं कोई किलकारियां तो सुन तो लूं, किसी गाड़ी को चलने की आवाज ,हवा में कौंधते हवाई जहाज की आवाज , किसी की गन गुनाने की आवाज ........ कुछ भी सुन नही पा रहा था , उम्मीदों की दीया जलाए रखने के लिए इस तरह की तेल बाती का होना जरूरी है। खिड़कियों से चिड़ियों का मधुर संगीत अब डराने लगा है। , धूप छांव, बादलों की गड़गड़ाहट तो जान ही निकाल लेगा। क्या मौत का भय से भी अधिक भय आज जिंदा रहने में है?सोच कर और भी मन व्याकुल हो रहा था। और एक झटके में दरवाजा खोलकर बाहर सड़क पर आ गया। ... वीरान पड़ी सड़के और भी डरावनी लगने लगी , व्याकुल हो चारो तरफ कुछ क्षण निहारता रहा, कुछ नही था बाहर भी , मानो यहां भी एक अदृश्य दीवारों ने घेर रखा है। उफ्फ!! ट्रेन बस , अन्य गाड़िया भी तो नही चल रही , न जाने वो लोग कहाँ गए, जो भीड़ बनाते थे,जो एक दूसरे को देखजर मुस्कुरा देते थे, किसी का हालचाल पूछ लेते थे, सबसे सबका सम्पर्क कट गया है, कैसे अपनो के बिना लोग जी रहे, मुस्कुराये बैगेर भी कोई जी सकता है क्या!!सिर उठाकर आसमान की ओर देखने लगा। नीला आसमान मानो मुझपर मुस्कुरा रहा था , नीला आसमान कुछ ज्यादा ही नीला था मानो स्वर्ग आरपार दिख रहा हो। सोचा कुछ और दृष्टि लगाऊं कुछ दिख जाए लेकिन एक डरावनी आवाज सुनाई दी , यह एक सायरन की आवाज थी .... न जाने यह एम्बुलेंस था या पुलिस .. उल्टे पांव अपने घर मे आकर खुद कैद हो गया। टीवी का रिमोर्ट दबा दिया... कोरोना से मरने वालों की आंकड़ा बढ़ गयी थी , पोजेटिव मरीजो की आंकड़ो में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। दुनिया संकट की मुहाने पर आ रही है , फिर कहाँ से लाऊं पोजेटिव विचार !!बन्द कर दिया टीवी , क्लासिकल इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक ऑन करके फिर दीवारों से आज बात करने लगा। मैं ही था और मेरी तन्हाई। ©nitesh
क्रमशः
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