रविवार, 26 जनवरी 2020

तन भारतीय हो जाये

शपथ गणतंत्र की है कि
मन की चादर बने तिरंगा
तन भारतीय हो जाये

गैरो की खातिर अपनो से
बैर बनाकर क्या रखना
कुछ कर गुजरो ऐसा
कर्म सराहनीय हो जाये

साथ सभी का हो देश में
राग एक स्वर का गुंजित हो
पृथक पृथक जन का छोड़ भ्रम
जन जन  माननीय हो जाये

देश प्रेम से ओतप्रोत
राष्ट्र द्रोही का पहचान कर
कर तिरस्कार घुसपैठियों का
ज्यों जीवन असहनीय हो जाये

शपथ गणतंत्र की है
मन की चादर बने तिरंगा
तन भारतीय हो जाये
©nitesh

खत मेरा पढ़ा ही कहाँ

रात इतनी भी लंबी नही थी
सुबह होने तक 
वो जगा ही कहाँ

सात फेरों तक पहुंच जाते सफर
शपथ संबंधों का 
निभा ही कहाँ

मैं कहा था बहुत कुछ
सुना ही कहाँ

अभाव में भी प्रेम  टिक सकता था
 दूर तलक
साथ चलने को 
कदम बढ़ाए ही कहाँ

जमाने की तंग नजरो से बच सकता था
जमाने के सामने आकर
तूने प्यार 
जताया ही कहाँ

गैरो की बातों को सीने से लगाई रही
एक बार इन आँखों मे देखकर
हाल मेरा पूछा ही कहाँ

दूर हो जाती हर गिला शिकवा
तेरे किताब में छुपाया था जो खत
वो तूने पढ़ा ही कहाँ

मैं कहा था बहुत कुछ 
सुना ही कहाँ
©nitesh

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

वो सुना ही कहाँ

उसके संसार का
एक मैं ही सितारा था
मान सम्बन्धो का वो रखा ही कहाँ
मैंने कहा था बहुत कुछ
वो सुना ही कहाँ
अपना पराये का भेद बताता देता उसे 
बताना चाहा 
वो सुना ही कहाँ

बात को बतंगड़ बना ले गए
हाथ आएगा क्या
ये समझा ही कहाँ

उत्तर मिल गया होता हर प्रश्न का
आंख के अश्क को 
उसने पढ़ा ही कहाँ

पत्तों में भी कुछ काँटे थे
फूल के खातिर उसने
इन पत्तों को देखा ही कहाँ
 
मूल #मैथिली गीत से प्रेरित
©nitesh

सोमवार, 6 जनवरी 2020

वर्तमान राजनीतिक समस्या

देश की आधारभूत समस्या ,महंगाई, बेरोजगारी,जमाखोरी, कानून व्यवस्था, चिकित्सा आदि सब कहीं गुम हो गए या अब यह समस्या है ही नही, या इस समस्या से पक्ष विपक्ष भटक गए,  बहुत चालाकी से देश CAA और NRC जैसे अफवाह वाली तथ्यों में उलझकर सरकार को विपक्ष फायदा पहुँचा रही है। विपक्ष देश को जानबूझकर किसी तानाशाही परिपाटी पर ले जाना चाहती है। आज की युवा जब तक इस साजिश को समझ पाएगी देश बहुत पीछे जा चुका होगा। विपक्ष बहुत और बहुत कमजोर होता जाएगा और पक्ष तानाशाह होता जाएगा। देश हित मे  कांग्रेस, और परिवारवादी क्षेत्रीय पार्टी लपने नेतृत्व में परिवर्तन कर नई पीढ़ी के विचारवान युवा को नेतृत्व सौंप दें। अपनी निजी स्वार्थ में देश को बर्बाद न करें। आज भाजपा कांग्रेस के शाशन काल  के कतरनों की होली जला रहा है, और विपक्ष इसके इर्दगिर्द डांडिया कर रहा है।  आम जनता रोटी कपड़े की जुगाड़ में व्यस्त है, हराम की कमाई वाले युवाओं को दंगा भड़काने में व्यस्त है ,लेखक ,पत्रकार, फिल्मकार,स्तंभकार ,बौद्धिक माफिया वर्तमान स्थिति में अपना स्वार्थ तलाश रहे है, राजनीति के द्वार पर राज्यसभा के टिकट या अवार्ड की भूमिका बना रहे है। मूलभूत समस्या कहीं गुम है।
©nitesh