(1)
किन किन बातों का जिक्र करूँ
हर पाँवदान पर फिसलता रहा हूँ
कभी अभाव से
कभी किसी की प्रभाव से
कभी खुद की स्वभाव से
(2)
उम्मीद ने कभी हार नही माना
यूँ हम बिखर जाएंगे
कभी सोचा तो नही था
तुम जानो या न जानो
दोस्तों और दुश्मनों के दिल मे
यूँ हम सवँर जाएंगे
ये भी कम तो नही था
(3)
जब जब तुम ईर्ष्यालु हुए
मुझे लगा कुछ तो है मुझमें
तुम मेरी चर्चा सरेआम करते रहे
मैं मित्रो की परीक्षा
अमित्रों की धैर्य पर खड़ा उतरता रहा
फिर तो अफवाहों ने भी जम कर कहा
कुछ तो है अब तुझ में
(4)
तुम बहुत बहुत सुंदर लगती हो
तस्वीर की तरह
तेरी मुस्कुराहट तेरी अदा
क्या उम्दा है
तकदीर की तरह
हर किस्सा दूर का ही पसंदीदा होता है
अपना किस्सा भी होता है
किसी राहगीर की तरह।
©nitesh
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