शनिवार, 3 मार्च 2018

ताजमहल जैसी एक कलाकृति बिहार में भी है

मित्रों ,मेरी ली हुई दो तस्वीर आपके समक्ष प्रस्तुत है,मेरे ख्याल से समानान्तर अध्ययन आवश्यक है, दोनों मकराना संगमरमर के बना हुआ है,बेल बूटे, नक्कासी दोनों में उम्दा किस्म का है,दोनों का अपना इतिहास है,एक मुगलो का कृति है तो एक भारतीय हिन्दू शासक द्वारा निर्मित,एक मे प्रेम का प्रतिरूप है तो दूसरे में आस्था का स्वरूप है ।
राजनगर,मधुबनी में 18वीं सदी का निर्मित यह माँ काली मंदिर की बनावट, नक्काशी, बेलबूटों को देखने से ताजमहल जैसा ही लगता है, चमक तो आज भी ताजमहल से ज्यादा है, लेकिन दुर्भाग्य है मिथिला का,बिहार का कि इसकी देखभाल और प्रचार प्रसार  शून्य है, वीरान पड़ा यह ऐतिहासिक धरोहर दिनरात अपने पीढ़ियों के उदासीनता पर आंसू बहा रहा है।समाजसेवी,इतिहासकार,साहित्यकार,कलाकार और सरकार की घोर उपेक्षा के कारण बिहार का यह बेशकीमती धरोहर वीरान पड़ा है , सन्निकट के कई बेशक़ीमती मंदिर और इमारत धराशायी हो चुका है,। अगर इसे बचा लिया गया और प्रचारित किया गया तो निश्चित तौर पर उत्तर बिहार में लाखों लोगों को पर्यटन से रोजगार मिलने की उम्मीद जगने लगेगी,। यदि बर्बाद हो गया तो आनेवाली पीढ़ी अपने पूवजों को कभी माफ नही करेगी। उम्मीद है बिहार,और बिहार से बाहर के लोग इसे बचाने के मुहिम में मेरा साथ देंगे, अपने धरोहर को बचाने में सहयोग करेंगे,

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