आसान नही होता
ये अंतर्मन की यात्रा
उम्मीदों की चिता जलाना पड़ता है
अपेक्षाओं आकांक्षाओ को
दफ़नाना पड़ता है
ईर्ष्या -प्रेम से मुंह मोड़ना पड़ता है
मोहपाश को तोड़ना पड़ता है
अतीत को त्याग कर
भविष्य का झोला उठाकर
फिर अज्ञात पथ पर निकलना पड़ता है
उस पथ पर जहाँ
क्लेश रंज मात्र भी नही
अंधेरा भी प्रकाश की भांति चमकता हो
संशय का नामोनिशान न हो
हर क्षण अलौकिक अहसास हो
सत्य हो और कुछ नही
खुद की समीक्षा हो
स्वयम का सम्मान हो
स्वयम ही आत्मा हो
स्वयम ही परमात्मा हो
सृष्टि का साक्षत्कार हो
शून्य ही सम्पूर्ण हो
शून्य में ही आनंद
आनन्द ही प्रकृति
शून्य ही सत्य
शुक्रवार, 13 सितंबर 2019
यात्रा
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