शनिवार, 1 जून 2019

आज का युवा

आज का युवा
संस्कारो में नही बंधना चाहता
दस्तूर का दस्तक नही सुनना उन्हें
जीना है उसे अपने शर्तो पर
उसे आगे निकलना है
सबसे आगे, 
बहुत तेज दौड़ना है
रुकना पसन्द नही
टोकना पसन्द नहीं
जिद्द है कुछ करने की
कल को नही ढोना उसे
उसे आज में जीना है
कल की चिंता भी नही
नीर छीर नही चाहिए
रिश्ते नाते कसमे वादे
नही चाहिए
रुकना नही चाहता
झुकना नही चाहता
पुराने ख्यालो को ढोना नही चाहता
अपनो से दूर रहकर
अपना बनाना चाहता है वो
मुट्ठी में दुनिया बसाना चाहता है वो
विज्ञान का सल्तनत बसाना चाहता है वो
नही चाहिए उसे पोथी
पेड़ का छांव,ताल तलैया
खेत खलिहान,दादा का दलान
मां का आँचल, काले बादल
आंखों के नीर, बातें गम्भीर
मीठी पकवान, ममता मयी मुस्कान
ये सब बना लेता है अब कम्प्यूटर में
चीख  चिल्ला लेता है मोबाइल पर
घर बसा लेता है नेट पर
उसे नही चाहिए धूल से ढका संस्कार
बड़ो बुजुर्गो का प्यार
उसके सोशल मीडिया पर
बस गया है घर संसार।
©नितेश भारद्वाज