सोमवार, 6 अप्रैल 2020

मेरा एकांतवास 2

##मेरा_एकांतवास 2
बाबूजी रेलवे से अवकाश प्राप्त कर गांव आ गए थे , यह उनका ही फैसला था। गाँव मे खेतीबाड़ी थी। लेकिन 42 साल तक रेलवे की नौकरी करने के बाद घर पर नए सिरे से एक काम मे लगना आसान नही था। वो बिल्कुल सामाजिक नही थे , किसी के दरवाजे आना जाना और देश दुनिया पर चर्चा करना उनके दिनचर्या में नही था, फिर समय को काटना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने एक भैंस  खरीद लाये। सभी बेटों को ये बात ठीक नही लगी। दूध तो खरीदकर भी उपयोग कर सकते थे । लेकिन उनका अपना ही तर्क था। कहते थे , भैस के बहाने के बार बार विस्तर से उठकर उसे चारा पानी देने जाना पड़ेगा। अंदर बाहर करने में भी कुछ शारिरीक श्रम होगा।।  सबने देखा कि जब उम्र और बढ़ने लगी तो स्टूल पर बैठकर चारा काटते और खिलाते, साइकल चलाते जहां नही चला पाते तब भी साइकल को पैदल ही ले आते लेकिन नित्य बाजार से ताजी सब्जी लाते। आखिरी समय भी साइकल से गिरने के कारण ही ब्रेन हेमरेज हो गया और हमलोगों को छोड़ परलोक चले  गए। आज लगता है कि एकांत के लिए भी कुछ कार्य अवश्य चाहिए ,खासकर जब आप सोशल कम हो तो।  मैं न तो कोई लेखक, पत्रकार या फ़िल्म बंधुओ के  जमात का हिस्सा रहा हूँ ,नही किसी ब्रांड से जुड़ कर कार्य किया । इसलिये सदैव स्वतंत्र ही रहा। किसी अखबार या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए काम करना मेरे बस की बात नही थी चूँकि जीवन यापन के लिए यह कार्यशैली मुझे भा नही पाया। स्वंतंत्र कार्य ही पसन्द था वही कर भी रहा हूँ ,इस लिए सामाजिक सरोकार के बाद भी अकेला ही हूं। ऐसे में एकांत वास में खुद को व्यस्त रहने की तरीका तैयार कर रहा हूँ। लोगों का पोस्ट पढ़ना, कुछ बचे हुए पुस्तक पढ़ना, और समय समय पर किचेन जाकर कुछ बनाकर खा लेना। वास्तव में खाली बैठने पर उटपटांग खाने का बहुत मन करता है। ये अच्छी बात है कि कुकिंग मुझे अच्छा भी लगता है ,और जरूरी भी। और जब खुद को ही बना कर खाना है तो बेहतर  क्यों न खाये। जो स्वास्थ्य के अनुरुप हो।  सामान्य दिनों के अपेक्षा फोन का आदान प्रदान भी कम ही है शायद लोग अपनो में व्यस्त है। हाँ देश दुनिया की खबर देश के विभिन्न कोने से फोन पर आ ही जाता है ,कुछ खबर पर खुद ही तहकीकात कर लेता हूँ। कुछ  पूर्व परिचित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी एवम विश्वसनीय पत्रकार मित्र है जिसके सहारे तथ्यात्मक बातें फेसबुक मित्रो तक पहुँचा पाता हूँ।
आप भी खाली समय मे खुद को शारीरिक और मानसिक कार्यो में व्यस्त रखे।  मनोबल बनाये रखे।इस महामारी से सुरक्षित रहे।
क्रमशः

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