सोनभद्र की घोरावल थाना के मूर्तिया गांव में 10 लोगों की हत्या और 24 लोगो का घायल होना, जनपद ही नही प्रदेश के लिए चिंता का विषय है, प्रश्न केवल ये नही है कि कानून व्यवस्था ही असफल है ,प्रश्न ये भी है कि स्थानीय और जिले के जिम्मेदार राजस्व विभाग इसे रोक सकता था।
पुलिस की नजरिये से देखा जाए तो एक बहुत बड़ी विफलता है कि 32 ट्रैक्टर से 300 लोगो की कब्जा करने की तैयारी और ये सभी का मौके पर पहुंच जाना स्थानीय और जिले की पुलिस पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या सब इस घटना के लिए पहले से मैनेज थे?? अपराधियो को भेज कर घटना का या जमीन कब्जा होने का इंतज़ार कर रहे थे?? क्या इसे समय रहते रोका नही जा सकता था ???
खैर ये तो तात्कालिक उपाय था लेकिन सोनभद्र में जो कभी मुफ्त का जमीन हुआ करता था आज समय के साथ बेशकीमती हो चला है उसे आदिवासियों के ही से अलग सफेदपोश ,दबंग, और राजनीतिक रुतबा वालो के नाम कर भविष्य की बड़ी बड़ी घटना को जन्म देने का काम सर्वे सेटलमेंट और राजस्व विभाग ने किया है। अनुमानतः डेढ़ लाख हेक्टेयर सरकारी और गैरसरकारी जमीन को इन लोगो ने कब्जा कर रखा है। सरकारी नुमाइंदे रिश्वत खाकर सरकारी जमीन की खोजखबर नही लेते वही गरीब अपनी बेबसी के कारण अपनी ही पुस्तैनी जमीन से हाथ धो बैठते है। अब जब ये बेशक़ीमती होने चला है तो इन गरीबो के पीछे भी कोई स्वार्थवश खड़ा हो गया है (इस घटना से ताल्लुक नही) नेपथ्य से कब्ज कब्जा की लड़ाई शुरू हो गयी है, ऐसे में ये घटना न तो पहली है और न ही आखिरी सोनभद्र के परिपेक्ष्य में। पूर्व और वर्तमान की जिम्मेदारों को जबतक जेल भेजने की कारवाई नही होगी ये घटना होती रहेगी , लोग मूकदर्शक बनकर देखते रहेंगे।
मूर्तिया गांव की घटना राजनीतिक दें नही है ये अधिकारियों ,कर्मचारियों की उपज है, इनपर अगर करवाई नही होती तो सांप की लकीर पीटने से क्या फायदा?सोनभद्र राजनीतिक और सामाजिक संवेदना शून्य है , यहाँ केवल सम्वेदनायें अवैध खनन, परिवहन के हिस्से के लिए उपजती है , ऐसे में कुछ मानवाधिकार सरीखे संघठन ,आगे आकर इनकी लड़ाई लड़कर इन क्रूरता से इनकी रक्षा करवा सकती है। नेता तो इसमें भी अपनी आर्थिक स्वार्थ ही ढूढेंगे।
बुधवार, 17 जुलाई 2019
जमीनी विवाद में 10 की हत्या
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सोनभद्र ही नही पूरे सूबे में माफिया,झगड़े की जमीन को एक पक्ष को मिलाकर लिखा लेंगे,फिर दोनों पक्षों को पैसा नहीं देगें। बनारस में हालांकि अधिक खराब हैं।हर गांव में छोटे बड़े,या सरकारी नौकरी वाले लोग दिन रात इसी काम में लगे हैं।मर्डर रोज होते हैं। हर मर्डर में पुलिस भारी वसूली करती है।फिर किसी को फंसा देती है। लोग लगे मरे कोई मतलब नहीं है।योगी जी को सावन के अंधे की तरह सब तरफ हरा भरा दिखाई देता है।
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