तम से तम का युध्द कैसा
हे प्रिय !
एक दीप जलाओ न
मन मे बहुत अंधेरा है
दूषित कलुषित जिजीविषाओं का
अनहद बसेरा है
हे प्रिय एक दीप जलाओ न
ज्वाला नही,उन्माद नही
शोर नही, चहुँ ओर नही
वाद नही ,विवाद नही
स्नेहवश कर थाम
राह दिखाओ न
हे प्रिय एक दीप जलाओ न
©nitesh