#मेरा_एकांतवास 6
आज खिड़की से बाहर देखा तो एक कौआ जो कभी विलुप्त था, (जी वही पुराना वाला कौआ अब तो सम्पूर्ण काले रंग के मिलते है कौआ काले के साथ गर्दन पर अलग श्यामल होता है) आज मुडेर पर बैठा मुझसे बातें करना चाह रहा था, उछल उछलकर बोल रहा था कि घर से निकलो , छुपकर क्यूँ बैठे हो?? मैं मुस्कुराया, और उसे बताया कि हम तुम्हारे लिए घर मे है ताकि तुम अब स्वतंत्र रूप से विचरण कर सको,
ठहाके लगाकर बोला, - तुम मनुष्य बहुत चालाक हो , अपनी जिंदगी की खतरा बढ़ी तो प्रकृति याद आने लगे।, बहुत अभिमान था तुम्हे अपने ऊपर,प्रकृति का दोहन कर भगवान बनने लगे थे। अब छुप गए हो, अब तुम्हारा दुश्मन कोई नही बस आदमी ही है और वो भी तुम्हारे निकट करीबी। अब बचो बच गए तो रोटी खिलाना नही तो मैं नोच कर खा जाऊंगा"
उसकी यह अट्टहास मुझे अंदर तक डरा गया, सचमुच हमारी अहंकार का अति ही तो है कोरोना का हमला, बहुत घमंड था चांद और मंगल तक पहुंचने का, बहुत घमंड था विज्ञान पर, बहुत घमंड था अपनी काबलियत पर , तर्क और ज्ञान का , आज सब अहंकार बेकार साबित हो रहा है, , हम भगवान ,अल्लाह सब का दुआ काम नही आ रहे , मंदिर मस्जिद, गुरुद्वारा सबके विधाता एकांतवास में चले गए, अब तो आजका भगवान बस डॉक्टर है जो जान बचा रहे है और पुलिस कोरोना के पास जाने के रोक रहे है। आज हम मजबूर है।
कौआ ने फिर टोका क्या सोच रहे हो?? मैंने कहा तुम शायद ठीक कह रहे हो, आज तुम स्वतंत्र हो और मैं कैद में हूँ, बच गया तो रोटी नही तो तुम मानव गोश्त खाकर मस्ती करना।
खुद ओर झुंझलाते हुए टीवी पर समाचार देखने लगा -मरकज से बाहर आये तल्बगी जमात के लोगो मे कोरोना की पुष्टि , कई राज्यो में पहुचाये कोरोना...उफ्फ!!कौआ तू जीत न जाना।
@nitesh
क्रमशः
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