बुधवार, 29 अप्रैल 2020

मेरा एकान्तवास 34

जितनी सन्नाटा बनारस की गलियां लॉक डाउन में है उतना तो दंगे की समय कर्फ़्यू में भी नही था। बनारसियों का मिजाज घुमक्कड़ी और अड़ी बाजी की रही है , लेकिन गली बिल्कुल सुनसान है। 65 वर्षीया फूलमती अपनी बड़ी बहू के साथ चार कमरे के दोमंजिला मकान में  लॉक डाउन का पालन कर रही है, सुना है बाहर पुलिस बहुत धड़ पकड़ कर रही है।  बगल के मदनपूरा मुहल्ले में कोरोना वाले को पुलिस डॉक्टर पकड़ कर ले जा रही है। बाहर से बनारस आने वालों की खुफिया जानकारी हासिल कर उसे पकड़ कर ले जा रही है इलाज के लिए ,साथ मे घर वालो पर मुकदमा उफ्फ!!ये क्या हो रहा है भगवान !फूलमती को अपने 26 साल के बेटे संतोष की चिंता है, वह दिल्ली में बिल्डर के यहां बिजली का काम करने गया था। पिछले कई दिन से उसका फोन भी स्विच ऑफ बता रहा था,  लॉक डाउन के दूसरे तीसरे दिन बात तो हुई थी, उसका मन घबरा रहा था, वह बनारस आना चाहता था, लेकिन माँ ने ही मना किया था, प्रशासन की धड़पकड़ देखकर।  चारपाई पर लेटे लेटे बेटे की उधेड़बुन में व्यस्त थी कि किसी ने दरवाजा खटखटाया। दिन का समय था लेकिन  धड़कन बढ़ गयी, आजकल पता नही कौन दरवाजे पर कैसे छूकर चला जाये, कहीं कोई थूक ही न लगा दे और कोरोना घर के अंदर आ जाये। रोज मोबाइल पर ऐसी वीडियो देख रही थी। फूलमती ने बहु से कहा देखो कोई बाहर दरवाजा खटखटा रहा है। पूछो कौन है?क्या चाहिए ?
बहु न कहा -आप ही देख लीजिए, पता न कौन हो?? मुझे तो आजकल हर आदमी से डर लगने लगा है।
न चाहते हुए भी फूलमती धीरे धीरे  दरवाजे के पास गई , दरवाजा बिना खोले ही बोली कौन हो??
 माँ..........
शब्द सुनते ही फूलमती की कलेजा हिलोरें मारने लगी , मां की ममता की ज्वार फूटने लगा उसने फिर जोर की आवाज लगाई 
"बहु संतोष आया है...दौर कर पानी साबुन लेकर आओ।"
अरे सच्ची.....आश्चर्य से बोली लेकिन दूसरे ही पल स्वर बदल गया
रुकिए माता जी.. पता नही देवर जी किन किन लोगों से मिलकर आये होंगे, उनकी जांच जरूरी है नही तो हमलोग भी....!
 बहु की बातें सुनकर फूलमती का उछल रहा कलेजा एकदम से बैठ गया।
बोली-- अपना बेटा है वो कोई भी बीमारी अपने मां के लिए नही ले सकता " 
तभी बाहर से  आवाज आई .. मां मैं दिल्ली से पैदल चलकर आया हूँ, थक गया हूँ ,बहुत भूख लगी है दरवाजा खोलो
बहु भाग कर आई और फूलमती की हाथ पकड़ते हुए बोली, आप ऐसी गलती न करें।  देखते नही कोरोना वायरस भी दिल्ली से ही फैला है, क्या जाने देवर जी के साथ कोरोना भी आया हो ,इन्हें पहले अस्पताल में जांच करवाइए।  बिना जांच में वायरस का डर तो रहेगा ही पुलिस अलग हम सब पर मुकदमा कर देगी।
फूलमती मन मसोस कर रह गई। अंदर से बोली कबीर चौरा अस्पताल से पहले जांच करा लो बेटा।
 माँ अब शरीर मे इतना जान नही बची है कि अस्पताल तक जा सकूँ! बड़ी ही मार्मिक स्वर था संतोष का।
थोड़ी हिम्मत बनाइये ,एकबार जांच करा कर आ जाइए। सब के लिए ठीक रहेगा""भाभी ने भी आवाज दी।
फिर संतोष की आवाज नही आई, शायद वह अस्पताल के लिए चला गया हो , यह सोचकर फूलमती और उसकी माँ निश्चिंत हो गई थी।
लगभग दो घण्टे बाद एक एम्बुलेंस की सायरन की आवाज सुनाई दी, लेकिन सास बहू दोनों में किसी की हिम्मत नही हुई दरवाजा खोलने की, मन आशंकाए से भर गया था, बाहर कुछ आवाज हो रहा था। पुलिस ने दरवाजा खटखटाया , और आवाज लगाई संतोष तुम्हारा लड़का था, 
 फूलमती का हलक सुख गया , मश्किल से बोल पाई 
जी,
वो दिल्ली में रहता था क्या?
जी
 घबराने की बात नही है उसे 14 दिन के आईशोलेशन वार्ड में रखा गया है, रिपोर्ट आते ही सब बता दिया जाएगा।
बहु और सास एक दूसरे की मुंह देखते रह गए।©nitesh
क्रमशः

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