#मेरा_एकांतवास 3
दिनचर्या का क्रम का घालमेल से मानसिक स्तिथि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है,कभी कभी लगता है कि मैं बीमारी की हालात में ही घर मे हूँ। यह इसलिए की बाहरी हर हरकत पर पाबंदियां लगी हुई है। लेकिन सोशल मीडिया की एक्टिव मित्रो को देखकर दुनिया रफ्तार में लगती है। दिल्ली की भीड़ ने सहसा डरा दिया है। आरोप प्रत्यारोप उचित भी है । लेकिन भीड़ की भी एक अपना मनोविज्ञान होता है, बहुत आसानी से नही समझाया जा सकता जितनी आसानी से बहकाया जा सकता है।, अब तो यह बाढ़ फाटक तोड़ चली है ,समंदर में मिलने से पहले तक तो चिंता बनाये ही रखेगा। फेसबुक पर पोस्ट किया गया चुटकुला प्रहसन आरम्भ में तो ठीक लगता रहा लेकिन अब अप्रसन्नता की स्तिथि में यह भी उबाऊ ही कर रहा है। हर आदमी को जीवन की उपयोगिता शायद समझने लगी है। हर आयुवर्ग के लोगो के लिए एक आत्मनिरीक्षण का समय है। हर वैचारिक लोगों के विचार और मन का शोधन का समय है। उदंडता पर भी स्वतः अनुशासन भी काम कर रहा है। ये तो अच्छा है कि रामायण और महाभारत जैसी सीरियल प्रारम्भ हो चुका है, जो भारतीय दर्शन के प्रतीक है, आज विश्व को केवल भारतीय दर्शन ही बचा सकता है,सामूहिक रूपसे इसका आनंद लें। अब शायद उन लोगो के संबध में भी विचार करना होगा जो घर से बाहर हमारे लिए कार्य कर रहे है, उनका इस समय सुरक्षित होना जरूरी है, पूरा समाज इन्ही लोगो के उम्मीद पर खड़ा है, आज उनकी ईमानदारी पूर्वक कार्य का इम्तिहान है , कल तक तो हमने बहुत सारी आरोपो से मढ़ते थे आज उनके लिए प्रोत्साहन की जरूरत है। हालात उनके लिए भी भारी है जिनके घर मे कोरोना के अलावा है। अन्य सामान्य और गम्भीर रोगों से पीड़ित बच्चा और बुजुर्ग है।
आज जरूरत है अपने मित्रों ,सेज सम्बन्धियों का मनोबल बढ़ाते रहे। यह 21 दिन में मानव के स्वभाव में बहुत परिवर्तन होने वाला है। विचार, प्रेम,विच्छोभ , क्रोध, मोह, लोभ, और कार्य के प्रति उत्साह में परिवर्तन होने लगेगा। , 8स लिए आपका एक दूसरे से सम्पर्क जरूरी है। इन सबके बीच मोबाइल ही एक उचित साधन है। आप किसीका कोई भला नही कर सकते चूँकि आप कह उसी स्तिथि में ऐसे में एक दूसरे का मनोबल बनाये रखना भी एक बदी समाज सेवा है। आप स्वस्थ, सुरक्षित रहे और दूसरों को भी रखे।यही कामना है।
क्रमशः
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