सोमवार, 26 अगस्त 2019

मुश्किल

बहुत मुश्किल है इस आबोहवा में
विचारों के पतंग से पेंच लड़ाना ।
झूठ फरेब ओ दहशत के फिजा में
तेरे सामने खुद को जिंदा बताना ।।
©nitesh

बुधवार, 14 अगस्त 2019

वो आखिरी सावन

यही तो महीना था सावन का
जब आखिरी बार निहार पाया था उसे
सहेलियों संग बारिश में भींग कर
खुले आसमान में
उस ट्रेन का इंतज़ार कर रही थी
जो मुझे लेकर जा रहा था
लंबी से ट्रेन में एक झलक पाने को
सावन की बूंदों में आंसुओ की धार
बहा रही थी वो
जैसे ही गुजरा था उसकी निगाहों से मैं
उछल कर खूब हाथ हिलाई थी
फिर दोनों हथेलियों से मुंह ढक कर
खूब हिचकोले ली थी
तब तक ओझल हो गया था मैं
दूर बहुत दूर चला जा रहा था मैं
न जाने कैसे सम्भलकर गयी होगी वो
घर की चौखट तक
कितनी लड़खड़ाई होगी वो
कुछ नही था दूरियों के बीच
न खत न तार
न कोई सूत्रधार
आज की तरह न फोन न फेसबुक
बस एक वादा , एक भरोसा
जो उस पानी मे ही बह गया था
हाँ बचाकर रखा था एक हिचकी
जो प्रति दिन नियत समय पर
आ रहा था
यह समय भी उसीने निर्धारित की थी
शायद उसी ने मिटा दी
जाने क्यूँ वो हिचकियाँ अब नही आती
परन्तु उसकी चंद लम्हो में सदियों की बातें
आज भी तैरती है गेसुओं की खुशबू
और बिन रस्मो रिवाज की यादें।
आज भी वजूद में है वो मासूम सी
अधखुली सी अधर ,चंचल आंखों वाली
तस्वीर..........और वो दो पंक्ति की खत
©nitesh

बहन

बहन
बहन की छवि अब
घर की चहारदीवारी में हीं दिखती है
शहर की सड़कों पर 
जोड़ियों में दिखती है लड़कियां
गर टोक भी दूँ तो अपमान समझती है
लड़कियाँ
स्वच्छंद जीवन शैली में 
संस्कार से अनजान है लड़कियां
लाज विहीन, वस्त्र क्षीण
हमारी ही बहन
होती है लड़कियां
आंगन के बाहर बमुश्किल
मिलती है बहन स्वरूपा
भाई के भावनाओं के अभाव में
असुरक्षित है लड़कियां
भातृ भावनाओ से जुड़ने से
आज झिझकती है लड़कियां
कैसे कह दूं बहन वस्त्र सम्भल कर पहनो
हॉट सेक्सी नही अपनो की बहन बनो
आंखों की हया में सम्मान की गहना हो
हाँ कह सकूं कि तू मेरी बहना हो
वो आंखे निकाल लूँ उसकी
तेरी अंगों पर जो नजर टिके
बस संस्कारो में तुझे रहना हो

बहुत बड़ा मन करके
देखता हूँ नजरें नीचे करके
परन्तु भावनाओ में बसता नही
फैशन परस्त ये बहना
भाई की भी सम्मान हो
बहन कहने में भी अभिमान हो
तेरी हर चाहत का ख्याल रखे
संस्कारो का जब सम्मान रखे
तेरी ललाट की तेज चमके
तो उठ न पाए
बदनीयती की पलकें
छाती ठोक कर कह सकूं
हजारों में एक मेरी बहना है
मेरे घर समाज और संस्कार की गहना है।

गुरुवार, 8 अगस्त 2019

संसद में धारा370 के निरस्तीकरण पर विरोध के मायने

70 सालों में बिना कोई कठोर कदम उठाए,शान्ति और प्रेम के लिए प्रयास करते रहे। कोई नतीजा नही निकला, कई सरकारें आई और चली गयी सबके सामने कश्मीर समस्या ज्यों का त्यों रहा।अगर कांग्रेस सहित कई अन्य दल धारा 370 के हटाने के तौर तरीके पर सवाल खड़ा कर रहा है तो उसे ये सुझाव भी बतानी चाहिए जिसे पिछले 70 सालों में नही कर पाए। अगर आप जान बूझकर ये समस्या रखना चाह रहे थे ,तो बात दीगर है, हर साल सैकड़ो सैनिकों की कुर्बानी, हज़ारों नागरिक की जान जोखिम में रखे रहना , देश मे  सीमा को लेकर तनाव रखना ये सब क्या था?इसका समाधान क्यूँ नही ढूंढा गया?आज जब कठोर निर्णय लिया गया तो आप (विपक्ष)उखड़ गए। 
क्या देश मे दो विचारधाराएं पल रही थी ,जिसे अब बेनकाब होना पड़ रहा है ? या वोट के खातिर देश विरोधी विचारधारा को पालना चाह रहे है , कुछ ऐसी ताकतों को खुश करने के लिए विरोध कर रहे है जिससे वोट बटोरा जा सके। तो ये जान लीजिए इन वोटों  के मालिक भी अब आप अकेले नही रहे। आज आपकी विरोधी विचारधारा वाली छवि , आपको और देश को पीछे ले जा रही है। इन कृत्य से देश को अपना समझने वाली जनता न तो आपकी विरोध के सुर को समर्थन कर रही है ,ना ही आपके कार्यकर्ता इन बातों से इत्तिफ़ाक़ रखती है , देश का नुकसान इस बात से है कि कांग्रेस ,सपा जैसे मजबूत विपक्ष बहुत बहुत कमजोर हो  रही है , और सत्ता धारी मजबूत।  बिना मजबूत विपक्ष के सत्ता बेलगाम हो जाती है। कुछ तो ऐसा कीजिये जिससे जनता को आप पर विश्वास हो और अपने लिए रख मजबूत पक्ष ने सही विपक्ष ही चुन लें। देश हित के लिए आम जनमानस की  भावनाओ का सम्मान कीजिये , जबकि देशकाल के लिए बहुत जरूरी हो। केवल विरोध करने के लिए विरोध न करें। विरोध करने के लिए सत्ताधारी पार्टी की बहुत सारी कमियां मिलेंगी । जिससे अपनी राजनीतिक छवि बन जाएगी।
©नितेश