मैंने आज सोनभद्र में नक्सली का संस्थापक जैकरण उर्फ़ अशोक से पोलिसे कस्टडी में बात की । उसका नक्सली बनना एक इतफाक था ,वह शोकिया व् आकर्षण में पार्टी से जुड़ा,उसका कोई उद्देश्य नहीं था, परन्तु मार काट से नफरत करता था, यही कारन था की अगर नक्सली किसी की हत्या करते तो यह पार्टी में विरोध करता था,पार्टी ने इसकी शादी जबरदस्ती एक करप्ट लड़की पूनम से करा दी ,बाद में वह पुष्पा सेप्यार करने लगा और उसीसे शादी भी करलिया, अपनी अच्छी जिंदगी जीने क़े लिए पार्टी से अलग छुप कर रहने लगा.जैकरण की पत्नी का प्यार न सिर्फ जैकरण को सुधर दिया अपितु नक्सली गतिविधि को भी कमजोर किया। बकोअल पुष्पा "मै
जानभुझ कर इनसे प्यार की ,मुझे पता था की इनकी शादी हो चुकी है और पूनम से यह खुश नहीं जेल से आ
इ तो यह तय की की इन्हें इस पार्टी से बाहर निकालना है और इनके निकलने से पार्टी कमजोर हो जायेगा
पुष्पा का नक्सली से प्यार एक समाज क़े हित बहुत बड़ा त्याग है ,वह जैकरण से नहीं समाज क़े मुख्यधारा से प्यार की यह प्यार भी एक बलिदान है। वह आज फिर पति क़े साथ जेल गई.पर समाज से नक्सली विचारधारा कुछ कम कर गई.
pyar me bahut dam hai.vah duniya ki har samasya ko suljha sakta hai.
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