ये भोर तनिक थम जा रात चल रही है
उनींदी पलको में उसकी याद पल रही है
तू क्या जाने सपनो की कहानी
एहसासों में उनकी ये उम्र ढल रही है
गुरुवार, 5 अगस्त 2021
तनिक थम जा
जज्बात
मुझसे मेरा शब्द रूठ गया
बहुत ख्वाहिश नही थी
चाँद सितारों की
ना सोने चांदी की
मेडल पाने की
बस बिन बन्धन उछलकूद कर सकूं
धरा की आँचल में हरीतिमा निहार सकूं
न जाने कैसे किस पग मेरा
दिल की एक धड़कन टूट गया
फिर मुझसे
मेरा शब्द रूठ गया
अभी तो शेष जीवन का लक्ष्य साधा था
खुद से खुद को देशाटन का वादा था
कुछ अपलक ही तो निहार पाया था
न जाने किन अपराध से
मेरा मुझसे
रब रूठ गया
फिर मुझसे
मेरा शब्द रूठ गया
अब यह अवशेष लेकर क्या करूँगा
पग बन्धन तोड़ न पाऊंगा
आश्रित जीवन का मोल कहाँ
सांस जहाँ निर्बाध चले
अब वो पल क्षण कहाँ
परन्तु
नियति को सहना है
जो है भाग्य में उसे भोगना है
जो निश्चय है उससे डर कैसा
जो कड़ियां
टूट गया सो टूट गया
फिर मुझसे मेरा शब्द रूठ गया
©nitesh
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