सुनो तो!!!
बहुत मजबूत हो गया हूँ मैं
जिन जिन बातों से डराते थे तुम
उन सब पर विजय प्राप्त कर लिया हूँ मैं
तन्हा रहना और मुस्कुराना
खुद से खुद की बाते करना
अपनी अनुशासन खुद तय करना
हर एक पल में खुशियां तलाशना
प्रतिपल खुद के लिए कुछ काम तलाशना
इन सबसे अपने लिए कुछ पाना
बैगेर किसी की तन्हा जीना सीख लिया हूँ मैं
चिड़ियों के संग जगना
तारो के संग सोना
खुली हवाओ में जी भर कर उछलना
तेज धूप में तपाना
पेड़ो की छांव में गहरी सांस लेना
व्यंजनों की भरमार
जो खुद से किया था तैयार
इन सब से तृप्त मानव हो गया हूँ मैं
न उम्मीद न अपेक्षा न ईर्ष्या न द्वेष
न मोह न लिप्सा न लोभ न तृष्णा
न आने जाने का दुख ,न भविष्य की योजना
प्रकृति की नियमो में बंध गया हूँ मैं
सुनो तो
बहुत मजबूत ही गया हूँ मैं
©nitesh
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