स्व0इम्तियाज भाई
बहुत कम समय मे लोगो के दिल में जगह बनाने वाले इम्तियाज अहमद एक लोकप्रिय नेता के साथ साथ सधा हुआ व्यवसायी भी थे। सोनभद्र के पत्थर व्यवसाय से सभी वाकिफ है, बसपा,सपा और भाजपा सभी शासन में इनके सम्बंध बड़े बड़े नेता,मंत्री,और व्यवसायियों के साथ रहा, जाहिर है व्यवसायिक सफलता और राजनीतिक लोकप्रियता के साथ साथ आलोचक और दुश्मन का हुजूम भी तैयार होता रहा ,जहाँ सभी तबको के लोगों सुख दुख में तन मन धन से सहयोग कर लाखो लोगो को अपना मुरीद बना लिए थे वहीं व्यावसायिक प्रतिस्पर्द्धा के कारण कुछेक दुश्मन भी । शहर नगर और जनपद में बहुत तेजी से लोकप्रिय होने लगे थे,राजनीतिक परिपक्वता भी प्रागढ़ होने लगा था,कुछ ऐसे कार्य भी थे जिन्हें लोग नही पसंद करते थे लेकिन विरोध करने की क्षमता किसी मे न था, बड़े से बड़े दुश्मन भी इनके सामने पड़ते ही दोस्त बन जाते।इनकी एक मुस्कुराहट में बड़ी सी बड़ी समस्या हल हो जाता।इनकी मुस्कुराहट का कमाल था कि लाख विरोध के बाद भी वो दुबारा नगर पंचायत के चेयरमैन बने।अपने परिवार में एक ब्लॉक प्रमुख भी बनाने में सफल हुये।इन सब के बाद भी इनके प्रतिद्वंदी इनकी घात लगाकर हत्या कर दिए। परिवार की ओर से पुलिस को नामजद तहरीर दिया गया है। वास्तविकता तो सही अपराधी पकड़ में आने के बाद ही पता चलेगा।फिलहाल तो चोपन नगर सहित पूरे सोनभद्र में शोक की लहर है।
@नितेश
गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018
चोपन नगर पंचायत अध्यक्ष की हत्या
शुक्रवार, 7 सितंबर 2018
सोशल मीडिया का बगावत
पिछले लोकसभा चुनाव से उलट इस बार सोशल मीडिया पर मोदी जी के खिलाफ वातावरण तैयार हो गया है।खास बात ये है कि जिस stsc act के विरोध में सवर्ण मोर्चा खोल कर विरोधी वातावरण तैयार कर लिया है वही कोई भी stsc का ग्रुप ,संगठन या व्यक्ति भी मोदी के पक्ष में गुणगान करते नज़र नही आ रहे। लेकिन इस बात की गलतफहमी में भी नही रहना चाहिए कि वोट कांग्रेस को मिलेगा। संसद में तो मोदी और राहुल दोनों एक जैसे ही है। अब बिखर रही वोट को संभालने की राजनीति होगी, आखिर भारतीय वोटर भावनाओ से संचालित होते है।
बुधवार, 30 मई 2018
बुधवार, 23 मई 2018
बात जो अधूरे राह गए
पिछली लोकसभा चुनाव में मोदी जी की जिन जिन बातों से मैं प्रभावित हुआ था वो आज दूर दूर तक नही है,शायद वो लोकतंत्र के लिए सुनहरे थे --
* दागी माननीयों के मुकदमो को अलग से कोर्ट बिठा कर सालभर में फैसला सुनाना
*काले धन वालों का सूची सार्वजनिक करना
*सामान्य नागरिक संहिता बनवाना
*सांसद द्वारा गोद लिए गाँव का सूरते हाल बदलना
*अफसर साही में रिश्वत का लेनदेन न होना
*भ्रष्ट नेता और अफसर पर दंडात्मक करवाई होना
*प्रदूषण स्तर को कम करना
*मौलिक अधिकार का सुरक्षा करना
*शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में परिवर्तन लाना
*खेल, योगा, पर्यटन और संस्कृतिक गतिविधियों में युवाओ का भागीदारी बढ़ाना।
*राजनीति को स्वच्छ और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना।
ऐसे कई उम्मीद मेरे निजी विचार के थे जो पूर्ण नही हो पाए, जो कार्य हो गए वो सबके सामने है,जो हो रहे है उनके भी उम्मीद है , जो कार्य पिछली सरकार से अलग थी, वो भी समीक्षा योग्य है।।ये सत्य है कि विपक्ष में रहकर आईना दिखाना अलग बात है और सत्ता में रहकर आईना देखना एक अलग बात है। ये सभी राजनीतिक दल के लिए है जो जनता को अपनी सत्ता सुख के लिए माध्यम समझते है।जबतक राजनीति में त्याग नही होगी और सत्ता उपभोग की वस्तु होगी,नेता रातो रात अमीर होते जाएंगे,उनके बढ़ती हुई सम्पत्ति और अपराध पर अंकुश नही लगेगा तब तक जनता छला जाता रहेगा और इससे बेहतर शासन की उम्मीद करना कोरी कल्पना है।
गुरुवार, 3 मई 2018
मेरी माँ मिथिला
80 साल की बढ़ी माँ आज प्रतिदिन की तरह सुखी लकड़ियों को जला कर थोड़ा चावल और साग बनाने की कोशिश कर रही है, इस से ज्यादा अच्छा भी नही लगता, और बनाने का मन भी नही करता । कौन बर्तन माजेगा ,कौन बाज़ार से तरकारी ला देगा, टूट फूटा कच्चा मकान के देहरी पा बैठी किसी गांव की राहगीर से हरी सब्जी मंगा लेती है, रोज रोज ऐसा करने पर राहगीर उलाहना भी देती है कि बेटे के पास क्यों नही चली जाती और वो मां फिर दर्द भरी लब्जो से कहती है कि यहां कौन देखेगा, बाप दादा की सम्पत्ति , इज़्ज़तऔर मैथिली रीति रिवाज।
दो बेटे और दो बेटियों की बिधवा माँ बूढ़ी तो है लेकिन जज्बा अब भी जवान है, बाद वाला बेटा दिल्ली में है तो छोटा वाला बंगलोर में इंजीनियर है , बेटी दामाद भी बाहर बड़े शहर में है , कुल सात नाती पोता भी है। सबके शहरों में आलीशान मकान भी है, बड़ा वाला पांच साल से घर नही आ रहा वो दिल्ली में अपना इवेंट मैनेजमेंट का ब्यापार फैला रखा है तो छोटा इंजीनियर बेटा भी 3 साल से नही आया , पूछने पर बताती है कि उसे नॉकरी से छुट्टी नही मिलती । हाँ बेटी दामाद गर्मी की छुट्टियों में एक साल बाद करके आ जाती है। दोनों बेटे पैसे भी नही भेजते क्योंकि पिता का पेंशन अभी मां को मिलता रहता है, हाँ फोन पर हर सप्ताह कोई न कोई बेटा फोन करके हाल समाचार ले लेता है, लेकिन किसी बहु पोते पोती को इसके लिए भी फुरसत नही मिलती। अभी पिछले साल बड़े बेटे के 11 साल के बच्चे जब बीमार पड़ था तो यही से पचास हज़ार रुपए भेज था ताकि इलाज़ में कोई कमी न हो। लगभग मिथिला में औसतन हर घर की यही कहानी है, यहां रोजगार का अभाव है सो लगभग सभी जवान बेटा कमाने और उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाते है फिर वही के होकर रह जाते है,वही आलीशान मकान और अपना एक समाज बना लेते है,फिर बच्चो की शिक्षा की दुहाई देते हुए शहर को ही अपना सबकुछ मान लेते है,वही से फेसबुक पर मिथिला और मैथिली का अलख जलाते है,
बूढ़ी माँ भी बताती है कि मेरा बेटा भी मिथिला राज्य का अभियानी है उसे बहुत बड़े बड़े लोग जानते है कई बार वो पटना में मीटिंग करने भी आता है , बड़े बड़े मंच पर अपना बात रखता है ,लोग फूल माला से उसे स्वागत करता है,आगे बढ़ते हुए बोलती है कि जब मिथिला राज्य बन जायेगा तो मेरा बेटा भी बड़ा आदमी बन जायेगा, मेरे यहाँ भी पक्का घर बन जायेगा, तब मेरा बेटा रोज हमसे मिलने आया करेगा, अभी तो पटना आने के बाद भी फुर्सत नही मिलता उसे। बहुत बिजी रहता है, मिथिला के लिए जी जान लगा दिया है। फिर आंखों में आंसू लिए कहती है""मुझसे मिलने नही आता तो क्या? मिथिला में नही आता तो क्या?लेकिन मिथिला के लिए नेता गिरी तो करता है। यही माँ मिथिला का सेवा है, यही मां जानकी की सेवा है, हमतो यहां से रज्जू साह के हाथ मिथिला के पाग और जनेऊ भेज दिए है,कुम्हरौरी बनाये थे वो भी भेजे है ,बेटा को बहुत अच्छा लगता है"फिर फफक कर रोने लगती है!
©नितेश भारद्वाज
गुरुवार, 26 अप्रैल 2018
मैथिल
मिथिला मेरी भावनाओ का उपज हो
मेरी संस्कारो की खेती हो
मेरे रोम रोम का स्पंदन हो
मधुर स्वर की स्फुटन से
नित्य नेह का बंधन हो।
तब मैं मैथिल कहलाऊं।
ना कोई लेख पत्र में समझाए
ना उत्सव में बुला मैथिल बनाए,
ना कोई जाति की अहसास कराये
ना कोई सीमा रेखा में मुझे दर्शाये
जब स्वयं पाग पहन इतराऊं
तब मैं मैथिल कहलाऊं।
©नितेश
गुरुवार, 5 अप्रैल 2018
सांसद का लेटर बम
#राजनीति
रॉबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार ने आज प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर चर्चे में आने की पुरजोर कोशिश की ,परन्तु इनकी राजनीतिक कद इनके भेके हुए बम को मंजिल तक नही पहुँचा पाया।जनता भी अब राजनीति जानने लगी है, अपने पिछले 4 साल के कार्यकाल में जनता और क्षेत्र के लिए शून्य के बराबर भी कार्य नही किये, न ही क्षेत्र का विकास कर पाए न ही अपनी पार्टी में छवि बना पाए, वैसे भी ये आयातित सांसद रहे है इस क्षेत्र के लिए। जनता खासे नाराज है, सम्भव है इन्हें पार्टी दुबारा टिकट दे कर इस क्षेत्र का और बंटाधार नही करना चाहती,ऐसे में जब देश मे sc st का समर्थन और विरोध का माहौल बना है तो उसे कैश करना लाजिमी भी है, अपनी पार्टी तवज़्ज़ो न भी दे तो विपक्षी शायद मुद्दे को तूल दे दे, हालात अनुकूल न हो तो भी विपक्षी पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद तो बनी रहेगी।खैर निजी हित के लिए ठीक भी जान पड़ता है लेकिन पिछले 4 साल का रिकार्ड से जनता शून्य के बराबर भी पसंद नही करते।
अब बात करते है आरोप की ...!लगाया गया आरोप भी इस सत्ता का काला सच है, जिससे हर कार्यकर्ता वाकिफ है।सोनभद्र के परिपेक्ष्य में जहां राजनीति शून्य क्षेत्र हो , जहां धन उगाही ही प्रमुख कार्य हो वहां इस तरह के आरोप को कोई महत्व नही देता ,सबको खनन से वसूली में जोड़ कर देखा जाता। है कि समय मे जिस तरह से अवैध खनन और वसूली पर जनपद में सत्ताधारियों पर ही चिल्लपों मचा रहा है और उसके एक किरदार संसद खुद रहे है यह उचित आरोप भी अवैध वसूली में दब के रह जाने जैसा है।काश सांसद ने कोई लोकप्रिय कार्य करके जनता में अपनी लोकप्रियता छोड़ी होती तो आज समर्थन भी मिलता, फिर येनकेन प्रकारेण अपने भाई की कुर्सी सुरक्षित करवाने के लिए यह पत्र से दवाब बनाबे की कोशस है।
सोनभद्र के परिपेक्ष्य में इस पत्र बम से कोई भी फर्क नही पड़ता,हाँ इन्हें टिकट नही मिलने की स्थिति में एक विकल्प की तलाश सुरक्षित रखने का प्रयास है
@नितेश
गुरुवार, 29 मार्च 2018
बोली
मुझे लगता है भोजुपरी अपनी शालीनता(कुछ फिल्मी अश्लीलता के बावजूद) के कारण देश विदेश के कई कोने में पहुंच गया, और मैथिली स्वम्भू होने की दशा में संवैधानिक मान्यता के बावजूद, अंगिका बज्जिका, में विभक्त हो रहा है, क्षेत्रीयता भी सीमांचल, मिथिलांचल, कोशियांचाल, अंग क्षेत्र, बज्जिका क्षेत्र में बट रहा है, ये स्थिति रही तो कुछ दिनों बाद गिनेचुने लोगो की बोली बनकर रह जायेगी मैथिली। मैथिली में सब को समाहित करने का लय जब तक नही मिलेगा, लोग तबतक इस ओर आकर्षित नही होंगे। साहित्यकार भी अपनी क्षेत्रीयता और जुगाड़ तकनीकी तक ही सिमट रहे है,
मंगलवार, 27 मार्च 2018
बलात्कार के बाद निर्मम हत्या -एक सामाजिक अपराध भी है
बलात्कार और उसका निर्मम हत्या को रोकना किसी कानून या शासन की अकेले वश की बात नही,अन्यथा निर्भया कांड के बाद कठोर कानून और सज़ा के बावजूद इस मे इज़ाफ़ा ही हो रहा है , यह एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बुराई है इसमें समाज के सभी वर्ग को आगे आकर अपने पुराने संस्कार को संरक्षित करना होगा, एक सामाजिक बहस छेड़नी होगी आधुनिकता और अश्लीलता में अंतर समझना होगा।आज सबसे ज्यादा हिंसा और यौन शोषण करीबियों के द्वारा घटित होती है ,90 प्रतिशत घटना कानून के दरवाजे तक पहुच नही पाती ऐसे में किसी कानून या उसके पालन करने वाले इस तरह की घटनाओं पर पाबंदी नही लगा सकती,दूसरी तरफ कठोर कानून का भय और दुरुपयोग भी सामान्य घटना के बाद बलात्कार और हत्या को उद्वेलित करता है,ऐसे में बदलते रहन सहन और मोबाइल इंटरनेट के युग मे इसे रोक पाना भी असम्भव है, अतःसमाज और समुदाय में एक स्वच्छन्द बहस की जरूरत है,
विश्व रंगमंच दिवस
विश्व *रंगमंच दिवस* आपके लिए
आप महान हो
जो अपनी भावनाओं में
हर किरदार को जी लेते हो ,
दिल की दर्द को छुपाकर मुस्कुरा लेते हो,
आग पेट मे लगी होती है
और सामने मधुर स्वर निकाल लेते हो,
दर्द किसी का भी हो ब्यक्त आप कर लेते हो,
धन्य हो आप रूप सबका धर लेते हो,
बस खुद का कभी नही समझ पाते हो
प्रणाम आप रंगकर्मी को
जो समाज को सबरंग दिखा देते हो
©नितेश भारद्वाज
शनिवार, 3 मार्च 2018
ताजमहल जैसी एक कलाकृति बिहार में भी है
मित्रों ,मेरी ली हुई दो तस्वीर आपके समक्ष प्रस्तुत है,मेरे ख्याल से समानान्तर अध्ययन आवश्यक है, दोनों मकराना संगमरमर के बना हुआ है,बेल बूटे, नक्कासी दोनों में उम्दा किस्म का है,दोनों का अपना इतिहास है,एक मुगलो का कृति है तो एक भारतीय हिन्दू शासक द्वारा निर्मित,एक मे प्रेम का प्रतिरूप है तो दूसरे में आस्था का स्वरूप है ।
राजनगर,मधुबनी में 18वीं सदी का निर्मित यह माँ काली मंदिर की बनावट, नक्काशी, बेलबूटों को देखने से ताजमहल जैसा ही लगता है, चमक तो आज भी ताजमहल से ज्यादा है, लेकिन दुर्भाग्य है मिथिला का,बिहार का कि इसकी देखभाल और प्रचार प्रसार शून्य है, वीरान पड़ा यह ऐतिहासिक धरोहर दिनरात अपने पीढ़ियों के उदासीनता पर आंसू बहा रहा है।समाजसेवी,इतिहासकार,साहित्यकार,कलाकार और सरकार की घोर उपेक्षा के कारण बिहार का यह बेशकीमती धरोहर वीरान पड़ा है , सन्निकट के कई बेशक़ीमती मंदिर और इमारत धराशायी हो चुका है,। अगर इसे बचा लिया गया और प्रचारित किया गया तो निश्चित तौर पर उत्तर बिहार में लाखों लोगों को पर्यटन से रोजगार मिलने की उम्मीद जगने लगेगी,। यदि बर्बाद हो गया तो आनेवाली पीढ़ी अपने पूवजों को कभी माफ नही करेगी। उम्मीद है बिहार,और बिहार से बाहर के लोग इसे बचाने के मुहिम में मेरा साथ देंगे, अपने धरोहर को बचाने में सहयोग करेंगे,
मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018
प्रेम
प्रेम सतत एक दूसरे के हृदय में समाहित भावनाओ का संचार है,जहां सब कुछ शून्य है,निराकार है न कोई बाह्य न कोई अंतर्मन ,दो प्राणों का संयोग से बना अलौकिक काल है जो अनन्त काल तक स्मरणीय रहता है,सुख दुख, पाप पुण्य,लोभ मोह,आशा निराशा से परे है ,यही जीवन है, यही सत्य है, यही सफलता है,..........#यही_मेरी_कामना_है ।
©नितेश
गुरुवार, 18 जनवरी 2018
संकट में भित्तिचित्र
सोनभद्र में पाषाणकाल के दर्जनों भित्ति चित्र मौजूद है, पुरात्तवविद ,इतिहासकारों, समाजविज्ञानी, और पर्यटकों के लिए यह शोध और ज्ञानवर्धक दृश्य है, अपने मानव विकास के क्रम को जानने का अनूठा संग्रह है,
जनपद मुख्यालय से 2 किलोमीटर से 15 किलोमीटर के क्षेत्र में पसरा दर्जनों भित्ति चित्र आज अराजकतत्वों के चंगुल में समा रहा है , कंडा कोट पहाड़ी के दोनों छोर पर स्थित यह भित्तिचित्र को किसी अराजक और अविवेकशील लोग तैलीय पेंट से लिप कर इसे मिटाने की कोशिश कर रहे है, जिस कारण विश्व का अमूल्य धरोहर समाप्त होने को है, तत्काल इसे प्रसाशन द्वारा संज्ञान में नही लिया गया तो यह बेशक़ीक़ीमती अदियुग के पुरातत्व नष्ट हो जाएगा।
शनिवार, 13 जनवरी 2018
नितेश भारद्वाज
धर्म का सम्बंध किसी ईश्वर से नही है अपितु जीवन का बौद्धिक और सामाजिक विकास है।
©नितेश