शनिवार, 28 दिसंबर 2019

फिर मुझे जी लेने दे

इस गीत को कम्पोज कीजिये
ये जिंदगी फिर मुझे जी लेने दे
मासूम सा है ख्वाब
फिर मुझे जी लेने दे

एक अनजाना से लम्हा बड़ी खूबसूरत है
मेरी नादान दिल को इसे बड़ी जरूरत है

तेरा ही है फैसला
फिर मुझे जी लेने दे
ये जिंदगी.........

एक हंसी होठो पर खिल जाती है
दो दिल एक धड़कन में मिल जाती है
यह नया है कुछ
फिर मुझे जी लेने दे 
ये जिंदगी.......

हाथों की लकीर को फिर आजमाने दो
जिंदगी है मेरी इसे माथे पर सजाने दो

ये लम्हा कल हो न हो 
आज जी लेने दे
फिर मुझे जी लेने दे
ये जिंदगी
फिर मुझे जी लेने दे
©नितेश भारद्वाज

बुधवार, 4 दिसंबर 2019

मेरा अख़्स

मुद्दतो बाद आज आईना में 
खुद का अख़्स देखा
बहुत थका हुआ
टूटा हुआ बिखरा हुआ
शख्स देखा
कपाल पर उभर रही लकीरो में
जीवन की अनकही 
अनगिनत कहानी थी
हर पड़ाव पर
साथ चलने वालों की 
दी हुई निशानी थी
तार तार हो रही मर्यादाओ में
खुद को संभाले रखने को
उलझी हुई सी परेशानी थी
 सचमुच ये सब अतीत लिखती रही
ये आईना ही तो 
जो सब बयाँ कर दिया।
©nitesh