मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

मिल बैठे है पूरा परिवार

आ गए है अब अच्छे संस्कार
अब मिल बैठे है पूरा परिवार
हंसी ठिठोली और बातों की पोटली
छुटकी खूब बोलती है तोतली
भाभी भी माथे पर  पल्लू डाल ली है
हॉस्टल वाली मुन्नी भी रसोई सम्भाल ली है
टाइम से अब दवा मिलती है माता जी को 
 चाय के लिए हर घण्टे पूछा जाता है पापा जी को
 मोबाइल  से अब खीझ होने लगी है
मोबाइल पर पिंकी का प्यार उबाऊ लगने लगा है
खोज खोजकर रिश्तेदारों का फोन लगने लगा है
कब किसकी शादी थी
कौन चिढ़ने का आदि था
सब पर चर्चा होने लगी है
कौन  किताब लिए सो जाता था 
 कौन लूडो में बेइमानी करता था
किसकी चुगली चलती थी
किसकी किसकी गलती थी
दादी नानी के क्या क्या पसन्द थे 
मम्मी पापा कितने पाबंद थे 
 हमारी स्वतंत्रता ने हमे अपनो से दूर किया था
 मोबाइल ने सम्बन्धो को मिटाने को मजबूर किया था
 सारे गीले शिकवे दूर हो रहे है
हम आपस मे फिर एक हो रहे है
सब इस कोरोना का ही तो कमाल है
अपनी रिस्तो में ही हम मालामाल है
मृत्यु का भय  जीवन को करीब ला दिया
अपनो संग अभाव में ही जी लेंगे 
यह सुंदर गुण सीखा दिया।
©nitesh

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