#मेरा_एकांतवास 16
लॉक डाउन का प्रथम चरण अब समाप्ति की ओर है ,दूसरा चरण निश्चित ही प्रारम्भ होना है।, कमोबेश दुनिया घरों में सिमट गया है, संशय , भय के बीच अपनी उम्मीद बनाये रखने के जद्दोजहद में जन्दगी अन्तर्द्वन्द में उलझा हुआ है, यह 21 दिनों में हर व्यक्ति की अपनी कहानी है, कुछ का उत्साहित हो सकता है लेकिन बहुतेरों के जिंदगी में मनोवैज्ञानिक बदलाव भी होने वाला है। ऐसे में मेरा अपना एकांतवास स्व में सिमटने वाला रहा है। नितांत अकेला ,प्रातः संध्या वेला में कुछ मानव दिख जा रहे थे ,चार मंजिल का मकान , जिसके भूतल पर मेरा निवास , लॉक डाउन के साथ सभी घर बन्द कर अपने गंतव्य को चले गए , ,14 दिन बाद एक परिवार जो अपने मुखिया की आकस्मिक मृत्यु के बाद सभी सदस्य क्रिया कर्म के लिए गांव की ओर विदा हो लिए। 4000 वर्ग फिट के कैम्पस में अकेला तन्हा, न कोई आने वाला ,न ही कोई खोज खबर के लिए पूछने वाला। सवेरे से खुद को प्रेरित करना , कुछ बनाकर खा लेना, फिर इस कमरे से उस कमरे भटकना , शुरू शुरू में स्थिरता करने की कोशिश किया था परन्तु प्रतिदिन का बढ़ती कोरोना पोजेटिव की संख्या, और कुछ खास लोगो की लापरवाही चिंता का सबब बनने लगा, फिर खुद के समक्ष अकस्मात एक मृत्यु जिन्हें मैंने ही अस्पताल पहुचाया था , मनः स्तिथि को एक दम से झकझोर दिया था , और अब तो शायद एकांत में यह सच स्वीकार करने भी लगा, भय जैसी तो कोई बात नही परन्तु जीवन की वास्तविकता का दर्पण सदैव मुंह चिढ़ा रहा है, जिस जीवन की महत्व को कितना ही अहंकार से सजा रखा जाता है वह वास्तव में एक दम पतली शीशा से भी कमजोर है , एक दिए की तरह है जिंदगी एक हल्की सी हवा का झोंका इसे बुझा सकता है।और इसे बचाने में कोई नही होता आपका अपना , आप स्वयं जलते है और बुझ जाते है, यह संग्रह, मोह , अपेक्षा सब निरर्थक है । जीवन और मृत्यु की जंग में हर आदमी जब हलकान हो तो ऐसे में अपना ही जीवन महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में आप नितांत अकेले होते है, आम जीव की तरह आप इस धरती पर अकेला ही आना हुआ था और जाना भी अकेला ही होगा, तो अकेला जीना मुश्किल कहाँ है। इस 21 दिन में मुझे एकांत का एक मजबूत सम्बल मिला है , यह एक अमूल्य धरोहर है , स्वयं पर विजय प्राप्त करने की चरणबद्ध प्रक्रिया है । अगला चरण भी बेहतर होगा , मानव जीवन अपनी मूल स्वभाव में लौट आए यही उम्मीद है ।हाँ इन दिनों में मैं आध्यात्मिक तो नही अपितु प्रकृतिवादी हो गया हूँ।©nitesh
क्रमशः
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