#मेरा_एकान्तवास 41
व्यक्ति को सम्मान की चिंता सबसे ज्यादा अपनो के बीच ही होता है, खुद की सम्मान को बचाने के लिए कितने स्वांग रचना पड़ता है। गांव हो या शहर ,व्यक्ति आसपास टोले मुहल्ले में सम्मान है तो मनोबल बना रहता है, सम्मान भी जीवन की सफलता से ही होता है, आप की आय कितनी है, आप कितनी अच्छी जॉब करते है, आपका व्यवसाय कितना समृद्धि है, आप कितनी उच्च शिक्षा ले रहे है आदि आदि..। इन्ही कारणों से लोग गांव से भी पलायन करते है।गांव वाले इन चीजों पर बहुत ध्यान देते है। मैं जब भी गांव जाता हूँ तो लोग बहुत प्रेम से मिलते है, सभी प्रवासी की चर्चा होने लगती है, लोग यह सोचकर मिलने भी आते है कि समझ जाएं कि मैं ने कितनी उपलब्धि हासिल कर लिया है।अक्सर मैं गांव जाता हूँ तो एक सप्ताह तक ही रह पाता हूँ, किसी पारिवारिक आयोजन के कारण सम्भव हुआ तो 15 से 20 दिन का रुकना हुआ। एक बार बिहार में शूटिंग होने के कारण 3 महीना मुझे गांव से दूर ही रुकना पड़ा, इस कारण बहुत जल्दी जल्दी गांव में मैं दिखने लगा। एक दो सप्ताह की शूटिंग ब्रेक में मैं गांव पर ही आ जाता। आज भी गांव में बहुत कम ही लोग जानते है कि मैं फिल्म निर्माण से भी रिश्ता रखता हूँ, अक्सर मुझे गाँव मे दिखने से मेरे करीबी पट्टीदार परेशान होने लगे। धीरे धीरे टोले मुहल्ले में भी मैं चर्चा का विषय होने लगा। बात घर तक छन कर आई कि मेरा कोई जॉब था शहर में जो छूट गया या निकाल दिया गया। सब मैं बेरोजगार गांव में ही जीवन निर्वाह के लिए आ गया। बात जोरो से फैली और मेरे घर वाले डिफेंस लेने लगे । मां ने तो कई पड़ोसियों से झगड़ा कर ली, फिर तो अचानक एक सम्भ्रांत ईर्ष्या के ठीकेदार ने मुझसे पूछ ही बैठा"बहुत दिन गांव में रह गए इस बार। शहर में रोजगार छीन गया क्या???
मैं मुस्कुराया और सम्भल कर उत्तर दिया ""हाँ, कुछ ऐसा ही है , बहुत दयनीय हो गया हूँ, कुछ रोकड़ा मुझे मेरे घर पहुँचा दीजिएगा!
अजीब सा मुँह बनाया और आगे चल दिया, अंदर ही अंदर वो ईर्ष्यावश प्रसन्न हो रहा था।
मुझे समझ नही आ रहा था कि घर मेरा , यह गांव भी तो मेरा ही है, जीवन यापन के लिए पर्याय खेती है पूर्वजों का दिया हुआ, हर चीज़ में स्वालम्बन होने लायक तो गांव में भी हूँ ,फिर यहाँ के लोगो को मैं खटकता क्यूँ हूँ???
शायद अब लोग मुझे अपना नही प्रवासी ही समझ लिया है । फिर तो मैं जब भी समय मिलता हर महीने या दूसरे महीने ही गांव जाने लगा, जा जाकर लोगो से दुआ सलाम करने लगा, लोगो का हाल चाल लेने लगा। कुछ को तो फोन से भी उपस्थिति दर्ज कराने लगा। अब शायद लोगों में ये बात नहो ।लेकिन अपने ही गाँव मे बेगाना होना काफी दुखदायी था।©nitesh
क्रमशः
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