शनिवार, 7 मार्च 2020

होली हो जाये

तेरा मन मुझसे मिल जाये
तो समझो होली हो जाये
तेरे रंगों में मैं रंग जाऊं
तो समझो होली हो जाये
असमानता,दूरियां और,खाइयाँ 
ये बीच दूरी पट जाए
तो समझो होली हो जाये
राग द्वेष लोभ क्रोध की 
होलिका जल जाए 
तो समझो होली हो जाये
प्रेम त्याग और तत्परता का 
वासन्ती बयार बह जाए 
तो समझो होली हो जाये
तू मेरी गुझिया मैं दही बड़ा
आओ कुछ मीठा हो जाये
तो समझो होली हो जाये
©nitesh bhardwaj

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें