बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

रत्नगर्भा

#रत्नगर्भा
मैं हरदी सोन पहाड़ी हूँ
मत छेदों मेरे छाती को
अपनी समृध्दि के खातिर
नष्ट न करो मेरे थाती को
मुझे अक्षुण्ण रहने दो 
मेरा गर्भ स्वर्ण भरा है
समृद्द होने की लालसा में
मेरे गर्भ पर न आघात करो
तनिक स्मरण तो करो
युगों युगों से तेरा पेट भरा है
मेरे गर्भ 
मेरा अपराध क्या है
आम स्त्रियों की तरह ही
तेरे विपत्ति काल का सहचरी हूँ
तुम बुद्धिमान हो ,शक्तिमान हो
तुम जान गए 
मेरा अन्तः पहचान गए
कुछ स्नेह दिखलाओ
मेरे देह पर कुछ हरित लहराओ
स्वर्ण से भी बहुमूल्य 
पवन पानी जीवन लाओ
स्वार्थ समृध्दि के खातिर
न क्षत विक्षत करो छाती को
बहुत पीड़ा होता है 
संरक्षित रखो थाती को
अब तक सोन पहाड़ी हूँ
 मत छेदों मेरे छाती को!!!!
©nitesh bhardwaj

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