देखा जाय तो पिछले पांच साल में मोदी सरकार के पास एक काम के सिवा कोई और काम नही है जिसे वो जनता के बीच ला सके, वो काम है सरकार द्वारा मोदी नाम का मार्केटिंग और ब्रांडिंग। हम आप उसी ब्रांडिंग के शिकार है। जिस तरह किसी भी प्रोडक्ट का बार बार विज्ञापन देख कर उस प्रोडक्ट पर विश्वास करने लगते है और उसे खरीदना चाहते है (जैसे कभी मैगी हुआ करता था) वैसे ही बार बार ब्रांडिंग ,मार्केटिंग और विज्ञापन के जरिये जनता का माइंड वाश किया जाता है और मोदी मैजिक का ब्रांडिंग होता है जैसे "पहले इस्तेमाल करे फिर विश्वास करें'" घड़ी डिटर्जेंट की तरह। आप हम उस मार्केटिंग का शिकार है, लेकिन दूसरा पहलू ये है कि इस से बेहतर प्रोडक्ट का न तो मार्केटिंग हुआ ना जनता के बीच प्रजेंटेन्स। छोटी छोटी पार्टिया इस प्रचार महाकुंभ में कहीं खो गयी।
आज देश को एक मजबूत नेता की जरूरत है जैसे कभी, चंद्रशेखर सिंह, अटल बिहारी, वी पी सिंह, जार्ज फर्नांडिस, गुलजारीलाल, राजनारायण सिंह आदि हुआ करते थे, आज इसकी कमी है , राष्ट्रीय क्षितिज पर पहुंचने वाला विरोधी दल का कोई दमदार नेता नही है, अखिलेश, मायावती, नायडू, ममता आदि क्षेत्रीय राजनीति से बाहर आना नही चाहते, फिर ये सरकार किसी को मजबूती से उभरने नही देना चाहता, आप दुख से, निराश होकर अपने उस नेता को ढूंढते है जो आपकी तरह मोदी की बराबरी करे लेकिन हताश फिर मोदी पर ही नज़र पड़ता है कारण है #ब्रांडिंग. आज ढेरो समस्या ,स्थानीय मुद्दे कूड़े की तरह इस शख्स के ब्रांड में दब गया है, इस मे हैम सब दोषी है, खास कर वो राजनीतिक दल जो कल आम जनता को खूब बेवकूफ बनाया था आज इस नाम के आगे मजबूती से अपने आप को खड़ा नही कर पा रहा है।कल तक जब केजरीवाल अछूता था तो मजबूत था लेकिन इनकी राजनीति भी इसी में समा कर रह गई। जनता को ये सदमा पहुँचा कर इतना अविश्वसनीय बना दिये कि कोई हार्दिक, कन्हैया या जिग्नेश को स्वीकार करने से घबरा रहा है। आज भी देश को कुछ मजबूत विचारधारा वाली नेता की जरूरत है जो स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर खुद को जनता के बीच स्वीकृत हो।
© नितेश भारद्वाज
शनिवार, 4 मई 2019
राजनीतिक ब्रांडिंग
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