पिछली लोकसभा चुनाव में मोदी जी की जिन जिन बातों से मैं प्रभावित हुआ था वो आज दूर दूर तक नही है,शायद वो लोकतंत्र के लिए सुनहरे थे --
* दागी माननीयों के मुकदमो को अलग से कोर्ट बिठा कर सालभर में फैसला सुनाना
*काले धन वालों का सूची सार्वजनिक करना
*सामान्य नागरिक संहिता बनवाना
*सांसद द्वारा गोद लिए गाँव का सूरते हाल बदलना
*अफसर साही में रिश्वत का लेनदेन न होना
*भ्रष्ट नेता और अफसर पर दंडात्मक करवाई होना
*प्रदूषण स्तर को कम करना
*मौलिक अधिकार का सुरक्षा करना
*शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में परिवर्तन लाना
*खेल, योगा, पर्यटन और संस्कृतिक गतिविधियों में युवाओ का भागीदारी बढ़ाना।
*राजनीति को स्वच्छ और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना।
ऐसे कई उम्मीद मेरे निजी विचार के थे जो पूर्ण नही हो पाए, जो कार्य हो गए वो सबके सामने है,जो हो रहे है उनके भी उम्मीद है , जो कार्य पिछली सरकार से अलग थी, वो भी समीक्षा योग्य है।।ये सत्य है कि विपक्ष में रहकर आईना दिखाना अलग बात है और सत्ता में रहकर आईना देखना एक अलग बात है। ये सभी राजनीतिक दल के लिए है जो जनता को अपनी सत्ता सुख के लिए माध्यम समझते है।जबतक राजनीति में त्याग नही होगी और सत्ता उपभोग की वस्तु होगी,नेता रातो रात अमीर होते जाएंगे,उनके बढ़ती हुई सम्पत्ति और अपराध पर अंकुश नही लगेगा तब तक जनता छला जाता रहेगा और इससे बेहतर शासन की उम्मीद करना कोरी कल्पना है।
बुधवार, 23 मई 2018
बात जो अधूरे राह गए
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