उस दिन मेरे जेब मे केवल 100 रुपया था, बैंक अकाउंट भी जीरो बैलेंस पर था,,फक्कड़ बना था, लेकिन ये मेरे लिये कुछ नया नही था, मेरा ये डाक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माण का धंधा ही कुछ ऐसा ही है , किसी महीने खाने पीने , गाड़ी में तेल भरवानेऔर मकान का किराया देने से भी अधिक कुछ मिल जाता था जिसे मैं अपनी रहाइशी समझता था,बाकि तो कई महीने तक तो फाकाकशी ही चलता है,लेकिन उस दिन का एक सौ का नोट मुझे देश का सबसे अमीर होने का अहसास दिला रहा था,लग रहा था मानो बड़े बड़े धन्ना सेठ भी मेरे जैसा ही है। जितना वो खर्च कर सकता उतना मैं भी ही हूँ। जी वो 8 नवम्बर का रात्रि के 8 बजे के बाद का हालात था। अमीर गरीब सब सामान्य थे ,सामान्य ही क्यूँ, अमीर लोगोंके लिए तो ये अकूत धन आत्महत्या या सदमे के कारण अस्पताल में भर्ती हो रहे थे।सुबह से बैंक के लाइन में सभी साधारण आम जन हो गए थे । लेकिन धन्य है भारत के लोग जल्दी ही जुगाड़ के कारण अपने रौब में लौटने लगे , फिर होने लगी राजनीति , नफा नुकशान की नाप तौल, अब एक साल बीत गया इस नाप तौल में, अभी तक निष्कर्ष तो नही निकल पाया, लेकिन आज तक कोई भी मेरे सामने सीना तान कर अमीरी दिखाने की कोशिश नही की, शान शौकत में भी बदले हुए नए नॉट का धौंस नही दिख पाया,। सच बताऊं आलोचकों का बस यही कष्ट है , पैसा तो सबने उल्टे सीधे तरीके से बदल लिए लेकिन कोई गर्व से अमीर जैसा दिखने की चमक नही बना पाया। बस यही खुशी मुझे आज साल भर से फाकाकशी में अमीर जैसा फील करवा रहा है, न जाने कब तक इस तरह का कथित अमीर बना रहूंगा।
©नितेश
मंगलवार, 7 नवंबर 2017
100 का नोट
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अती सुन्दर सर जी ��
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