गुरुवार, 16 नवंबर 2017

पर्यावण प्रदूषण का निजी लाभ

#सोनभद्र
पिछले 25 वर्षों में मुझे कोई भी एक ब्यक्ति नही मिला जो सचमुच सोनभद्र के प्रकृति,पर्यावरण, पर्यटन, और प्रदूषण को बचाना चाहता हो,,संरक्षित करना चाहता हो, जिसने भी इसके लिए आवाज लगाने की कोशिश की वो भी कालांतर में प्रकृति दोहन कर धन कमाने लगे, या प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूपसे इस विषय पर आर्थिक संशाधन ढूढने लगे,राजनीतिक संरक्षण ,और राजनीतिक पहचान बनाने लगे ,परिणाम ये रहा कि सोनभद्र आज लोगो का झोली भरने में जीर्ण शीर्ण हो गया है , प्रदूषित होगया है, जंगली जीव विलुप्त हो रहे है,आने वाली पीढी के लिए संकट उत्पन्न हो रहा है, लेकिन चंद लोगों के लिए ये आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक लाभ लेने का साधन है । कुछ समय के लिए आने वाले जनपद के प्रशासनिक अधिकारी इनके शब्दजाल के शिकार हो जा रहे है, फिर से कथित पर्यावरण प्रेमी ,पर्यटन प्रेमी, समाज सेवी और राजनीति के धुरंधर बन जाते है ।

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