उसके संसार का
एक मैं ही सितारा था
मान सम्बन्धो का वो रखा ही कहाँ
मैंने कहा था बहुत कुछ
वो सुना ही कहाँ
अपना पराये का भेद बताता देता उसे
बताना चाहा
वो सुना ही कहाँ
बात को बतंगड़ बना ले गए
हाथ आएगा क्या
ये समझा ही कहाँ
उत्तर मिल गया होता हर प्रश्न का
आंख के अश्क को
उसने पढ़ा ही कहाँ
पत्तों में भी कुछ काँटे थे
फूल के खातिर उसने
इन पत्तों को देखा ही कहाँ
मूल #मैथिली गीत से प्रेरित
©nitesh
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