बुधवार, 17 जुलाई 2019

रोया है आज बाढ़ भी

बहुत रोया है आज बाढ़ भी
थम सा गया पानी का वेग
धरती भी कांप गयी
मानवता का हृदय भी
आज छलनी हो गया
जब मछली की जाल में
एक मासूम का मृत शरीर
मुस्कुराता हुआ बाहर निकला

माँ की स्तनों से चिपका लाल
काल के गाल में समा गया
अकेले ही नही था बाढ़ का वारिस
उसकी माँ, बहन और भाई भी थे
सबकी लाशें आयी
पानी से उतारकर
लेकिन वो लाल अब भी
बाहें फैला कर
माँ की गोद मे जाने को जिद्द कर रहा था
पानी मे कितना गोते लगाया होगा ये
डूबते हुए भी अपनी माँ भाई बहन को
तलाशा होगा
किलकारियां मारी होगी
लेकिन काल को दया नही आई
कुछ कर तो नही सकता मानव
पर आज बहुत कोशा है सबने
क्रूर काल को,बाढ़ को
खुद को और जिम्मेदार को
बहुत रोया सबने
हृदय सूख सा गया था ,
धड़कने थम सी गयी
पानी मे फेंके जाल से निकला
ये मुस्कुराता नोनिहाल का शव
को देखकर ।
©नितेश भारद्वाज

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