शनिवार, 6 अप्रैल 2019

वो लड़का कुछ कह गया

बनारस में अक्सर शांत रहने वाला एक रेस्टुरेंट में अपने मित्र के साथ शाम को पहुँचा था, करीब 15 साल का सुंदर लड़का आर्डर लेने पहुंचा, एक चौमिन और कोल्डड्रिंक का ऑर्डर देकर बातों में मशगूल हो गया, थोड़ी ही देर में वो चौमिन ले आया,हमने उसे दो प्लेट में सर्व करने के लिए कहा लेकिन वो ठिठका रहा दुबारा कहने पर वो प्लेट में डालने तो लगा लेकिन उसके हांथ कांप रहे थे। मैंने पूछा "क्या हुआ क्यूँ नही डाल रहे हो ??" उसने घबराते हुए कहा"कोई गलती तो नही हो रही है मुझसे भैया ?" "नहीं" मैं समझ गया शायद ये नया नया वेटर है, "अभी यहां नया नया काम कर रहे हो क्या"मैने पूछ ही लिया।
"हाँ अभी 5 दिन पहले ही काम पकड़ा हूँ, "बड़ी मायूसी से बोला।
"कोई बात नही तुम सब सिख जाओगे, इससे पहले क्या करते थे "मुझे जिज्ञासा हुई।
कुछ नही पढ़ रहा था 10 का बोर्ड था exam देकर यहाँ काम करने आ गया" अब और उदास होकर  वो बोला।
"कोई बात नही काम कोई छोटा नही होता छुट्टी भर काम कर लो ,सफलता के लिए सबको शुरू शुरू में ऐसे काम करने पड़ते है बाद में बड़े आदमी बन जाते है,तुम्हारे पापा क्या करते है??"उसका मनोबल बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन अब उसका आंख भर आया था ।
"भैया चोरी चमारी से तो ये अच्छा ही है, पापा नही है, केवल मम्मी है और मैं ,वो बीमार रहती है, इसलिए यहां काम करना पड़ा, आज दवा लेकर जाऊंगा ,11 बजे रात को छुट्टी मिलेगी तब।"
बाल मन और उसपर उसकी हृदयस्पर्शी शब्द से मैं भी आहत हो गया, फिर उसे कुछ कहने की साहस न थी मुझमें, मैंने उसका नम्बर मांग लिया ताकि फिर उससे बात कर सकूँ, वह फिर आगे की टेबल पर चला गया जहां उसी की ही हमउम्र का लड़का अपनी सहपाठिनी के साथ बैठा उसे आर्डर देने का इंतज़ार कर रहा था।

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