गुरुवार, 8 अगस्त 2019

संसद में धारा370 के निरस्तीकरण पर विरोध के मायने

70 सालों में बिना कोई कठोर कदम उठाए,शान्ति और प्रेम के लिए प्रयास करते रहे। कोई नतीजा नही निकला, कई सरकारें आई और चली गयी सबके सामने कश्मीर समस्या ज्यों का त्यों रहा।अगर कांग्रेस सहित कई अन्य दल धारा 370 के हटाने के तौर तरीके पर सवाल खड़ा कर रहा है तो उसे ये सुझाव भी बतानी चाहिए जिसे पिछले 70 सालों में नही कर पाए। अगर आप जान बूझकर ये समस्या रखना चाह रहे थे ,तो बात दीगर है, हर साल सैकड़ो सैनिकों की कुर्बानी, हज़ारों नागरिक की जान जोखिम में रखे रहना , देश मे  सीमा को लेकर तनाव रखना ये सब क्या था?इसका समाधान क्यूँ नही ढूंढा गया?आज जब कठोर निर्णय लिया गया तो आप (विपक्ष)उखड़ गए। 
क्या देश मे दो विचारधाराएं पल रही थी ,जिसे अब बेनकाब होना पड़ रहा है ? या वोट के खातिर देश विरोधी विचारधारा को पालना चाह रहे है , कुछ ऐसी ताकतों को खुश करने के लिए विरोध कर रहे है जिससे वोट बटोरा जा सके। तो ये जान लीजिए इन वोटों  के मालिक भी अब आप अकेले नही रहे। आज आपकी विरोधी विचारधारा वाली छवि , आपको और देश को पीछे ले जा रही है। इन कृत्य से देश को अपना समझने वाली जनता न तो आपकी विरोध के सुर को समर्थन कर रही है ,ना ही आपके कार्यकर्ता इन बातों से इत्तिफ़ाक़ रखती है , देश का नुकसान इस बात से है कि कांग्रेस ,सपा जैसे मजबूत विपक्ष बहुत बहुत कमजोर हो  रही है , और सत्ता धारी मजबूत।  बिना मजबूत विपक्ष के सत्ता बेलगाम हो जाती है। कुछ तो ऐसा कीजिये जिससे जनता को आप पर विश्वास हो और अपने लिए रख मजबूत पक्ष ने सही विपक्ष ही चुन लें। देश हित के लिए आम जनमानस की  भावनाओ का सम्मान कीजिये , जबकि देशकाल के लिए बहुत जरूरी हो। केवल विरोध करने के लिए विरोध न करें। विरोध करने के लिए सत्ताधारी पार्टी की बहुत सारी कमियां मिलेंगी । जिससे अपनी राजनीतिक छवि बन जाएगी।
©नितेश

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