एक गाँव चाहिए
जो शहर जैसा ना हो
पीपल का छांव चाहिए
जो खजूर जैसा ना हो
सुविधा कम हो
लेकिन पुरातन हो
खुले आसमान हो
बंद कमरे जैसा ना हो
मिट्टी हो ,अँगीठी हो
लीपा हुआ आँगन हो
केला की पात हो
मिट्टी का घड़ा हो
द्वारे पर खाट हो
गाय हो बछड़ा हो
बैल की गले की घंटी हो
एक अलाव हो
पड़ोसी से लगाव हो
मिट्टी का हो या फूस का हो
परन्तु कंक्रीट का जंगल जैसा ना हो
एक गांव चाहिए
जो शहर जैसा ना हो
-:क्रमशः
©️nitesh bhardwaj
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें