मुद्दतो बाद आज आईना में
खुद का अख़्स देखा
बहुत थका हुआ
टूटा हुआ बिखरा हुआ
शख्स देखा
कपाल पर उभर रही लकीरो में
जीवन की अनकही
अनगिनत कहानी थी
हर पड़ाव पर
साथ चलने वालों की
दी हुई निशानी थी
तार तार हो रही मर्यादाओ में
खुद को संभाले रखने को
उलझी हुई सी परेशानी थी
सचमुच ये सब अतीत लिखती रही
ये आईना ही तो
जो सब बयाँ कर दिया।
©nitesh
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