#जनसंख्या_नियंत्रण या जनसंख्या नियंत्रण कानून से किसे होगा लाभ ?
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हमारे प्रधानमंत्री विश्व मे यह घूम घूम कर कह रहे है कि सबसे ज्यादा युवा जनसँख्या का देश है भारत , इसलिए यहां अधिक व्यवसाय, तकनीकी, श्रम,और उपभोक्ता वाला देश है भारत। निवेश की बहुत उम्मीद वाला देश है भारत। इसके विपरीत अब यह समझने की बात है कि आज से मात्र दस साल बाद सबसे बूढा जनसंख्या वाला देश होगा भारत, जहां श्रम और उपभोक्ता कम हो जाएगा और विदेशी दवाओं का सबसे ज्यादा खपत वाला देश होगा भारत। यहां हिन्दुओ में उत्तम जीवन शैली की आदत ने एक दंपति में केवल एक बच्चा पालने का चलन हो चला है या इससे भी अधिक मात्र दो। दो बच्चों या उससे अधिक बच्चे वाली दम्पत्तियों की संख्या बहुत कम रह गया है , ऐसे में जो बच्चा 10 वर्षो में जवान होगा तब उनके माता पिता बूढ़े होचुके होंगे। और उनके कंधो पर बूढ़े माता पिता के साथ अति बृद्ध हो चुके दादा दादी और नाना नानी की भी जिम्मेदारी होगी।बहुत देर से शादी करने वालों में यह समस्या और भी विकट होगी ।ऐसे में भविष्य का युवा उन बहुसंख्य बृद्ध की जिम्मेदारी कैसे संभाल पाएंगे??इसे एक सामान्य उदाहरण से समझना होगा कि मैं 40 साल का भाई में अकेला हूँ पत्नी के अलावा मेरा एक बेटा 13 साल का है साथ मे 62साल के माता पिता मेरे साथ है ।अभी मैं युवा हूँ इसलिए मेरी जिम्मेदारी बच्चो के साथ केवल दो बुजुर्ग की है लेकिन जैसे ही मेरा बेटा 33 साल का होगा मैं 60 और मेरे माता पिता 82 वर्ष के हो चुके होंगे। अब मेरे बेटे की जिम्मेदारी मेरा मेरे पत्नी और मेरे माता पिता का भी देख भाल करना होगा और उसकी अपनी पत्नी और एक या दो बच्चे। क्या एक युवा इतने बुजुर्गो को संभाल लेगा जहाँ कुल जमा श्रम शक्ति कम हो जाएगी ? तो क्या वृद्धा आश्रम का चलन जोरो पर होगा?क्या संसाधन केवल दवा और चिकित्सा में लगेगा?क्या भारत मे हिन्दुओ के बीच केवल बूढो की जमात होगी? क्या उस समय हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में चिकित्सा, दवा और श्मशान की आवश्यकता रह जाएगी। जबकि दूसरे तरफ ज्यादा बच्चा पैदा करने वालों के बीच सभी सुख साधन और घर परिवार और वृद्धों की सुरक्षा की भरपूर व्यवस्था होगी। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण कानून किसके लिए या किस देश या समुदाय के लिए लाभप्रद है ?हिन्दू आज भी उच्चस्तरीय जीवन शैली जीने के लिए जनसंख्या पर नियंत्रण करके चल रहा है जिसकारण भविष्य का सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक आधार बिगड़ने वाला है। अगर हम आज नही चेते तो अपना ही भविष्य अंधेरे में अभी से दिखने लगा है।
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