ये बसंत
तू तो आज भी 16 की है
अमराइयों की महक
महुआ की मादकता
मिलन की आतुरता
विरह का दर्द
स्नेह का श्रृंगार
यौवन की ये हठखेलियां
सरसो की है
भोर की अंगड़ाई
दोपहर की अलसाई
शाम की आतुरता
निशा की तड़प
सबकुछ अब भी
जवां है
व्याकुलता-उन्माद
स्पंदन-सिहरन
गीत- संगीत
ये मद भरी
नयन की अदाएं
युगों युगों की है
ये वसन्त तू आज भी 16 की है।
©नितेश भारद्वाज
तू तो आज भी 16 की है
अमराइयों की महक
महुआ की मादकता
मिलन की आतुरता
विरह का दर्द
स्नेह का श्रृंगार
यौवन की ये हठखेलियां
सरसो की है
भोर की अंगड़ाई
दोपहर की अलसाई
शाम की आतुरता
निशा की तड़प
सबकुछ अब भी
जवां है
व्याकुलता-उन्माद
स्पंदन-सिहरन
गीत- संगीत
ये मद भरी
नयन की अदाएं
युगों युगों की है
ये वसन्त तू आज भी 16 की है।
©नितेश भारद्वाज
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