सोमवार, 18 मार्च 2019

ये बसंत

ये बसंत
तू तो आज भी 16 की है
अमराइयों की महक
महुआ की मादकता
मिलन की आतुरता
विरह का दर्द
स्नेह का श्रृंगार
यौवन की ये हठखेलियां
सरसो की है
भोर की अंगड़ाई
दोपहर की अलसाई
शाम की आतुरता
निशा की तड़प
सबकुछ अब भी
जवां है
व्याकुलता-उन्माद
स्पंदन-सिहरन
गीत- संगीत
ये मद भरी
नयन की अदाएं
युगों युगों की है
ये वसन्त तू आज भी 16 की है।
©नितेश भारद्वाज



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