टूटता रहा हर उम्मीदों की मोती
हम भी टूटे भरोसा भी टूटा
टूट गया हर आस्था ओ विश्वास
सुबक कर रोना, फिर खुद को संभालना
रुन्धती गले मे टूटती रही सांस
पल पल धोखा, पल पल चोट
हर मासूमियत में दिखता खोट
स्वयं का
यह अपराध बहुत गम्भीर है
सहज सरल प्रेम में किसी को पिरोना
ज़ख़्म खाकर उसके सपनो को ढोना
@nitesh
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