शनिवार, 11 मार्च 2017

आज भारतीय जनमानस

आज भारतीय जनमानस को भूत भविष्य के चिंता से परे है, वो वर्तमान देखता है ,नितान्त वर्तमान,उसमे ही अपना स्वार्थ ढूंढता है ,उसे सामाजिक कार्यो में वो दिलचस्पी नही ,वो सामाजिक त्याग में भी कोई लगाव नही , उसे तो उत्साह और उत्सव में उत्सुकता है ,युवाओ को पिछड़ापन वाली इतिहास में भी कोई लगाव नही उसे आधुनिक भौतिकवादी संस्कृति से आकर्षण है  ।ये विशाल जनसमर्थन वाली जीत से तो हम निजी तौर पर यही समझ सकते है,लोकतंत्र में विपक्ष का कमजोर होना भी चिंता का विषय है , राजनीती में जनता का आकर्षण का पता न करना और पुराणी परिपाटी से राजनीती करना नवपीढ़ी को घिसीपिटी लगती है , वरना 70 वर्ष और 25 वर्ष से रास्ता बनानी वाली पार्टियों का हश्र अचानक से स्याह हो जाना नयी सोच को जन्म देती है ।फिर मणिपुर में इरोम के लम्बे संघर्ष को  केवल 90 लोगो का समर्थन भी ये बताने केलिए बहुत है कि हम वर्तमान स्वार्थ के लोकतंत्र है ,विचारधारा और इतिहास का नही । 2014 से  तमाम घटना क्रम  में राजनीती को अब नई पीढ़ी दिशा देने लगी है ,पुरनीये और उनके विचार हाशिये पर ढकेले जा रहे है । भविष्य के चिंता से दूर आज लोकतंत्र बहक सा गया है , आज आवश्यकता है इस पर बहस का ,लोकतंत्र को परिभाषित करने का ,खुद को समझने का , इस बात को भी समझने का कि बरगलाने और मुख्य मुद्दा से हटकर  आपकी बातों को कोई समझने वाला नही , जनता अब कल वाली नही है ,जनता वर्तमान वाली है ,जो आपका उपहार से प्रभावित नही होता वो वैचारिक उत्सव को ढूंढता है , जो आज और अभी का ताज़ा तरीन हो ।
©नितेश

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